रायपुर में धान खरीदी और भंडारण को लेकर सियासत तेज हो गई है। Sushil Anand Shukla ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश के धान संग्रहण केंद्रों में करीब 20 लाख मीट्रिक टन धान खुले में पड़ा हुआ है, जिससे बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की आशंका बन रही है।

🌾 क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस के अनुसार:
- सरकार अब तक 20 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान मिलरों को जारी (उठाव) नहीं कर पाई है।
- धान लंबे समय से खुले में पड़ा होने के कारण उसकी गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ रहा है।
- बारिश, नमी और मौसम का असर सीधे धान पर पड़ रहा है।
आरोप क्या हैं?
कांग्रेस ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
- जानबूझकर धान का उठाव नहीं किया जा रहा
- खराब धान दिखाकर खुले बाजार में नीलामी की तैयारी
- मिलरों और सरकार के बीच कमीशन को लेकर विवाद
- आरोप कि मार्कफेड अधिकारियों द्वारा ₹20 प्रति टन की वसूली के बाद ही डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) जारी हो रहा
- करीब ₹120 करोड़ कमीशन का टारगेट तय होने का दावा
🐭 “चूहों पर जिम्मेदारी” वाला तंज
शुक्ला ने तंज कसते हुए कहा कि जब धान खराब होगा तो इसकी जिम्मेदारी फिर से “चूहों” पर डाल दी जाएगी—जैसा पहले भी विवादों में देखने को मिला है।
🏛️ सरकार की स्थिति
फिलहाल सरकार की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है (या अलग-अलग मामलों में सफाई दी जाती रही है)। आमतौर पर सरकार का तर्क रहता है कि:
- धान उठाव और मिलिंग प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से होती है
- लॉजिस्टिक्स, मिलिंग क्षमता और ट्रांसपोर्ट जैसी चुनौतियां रहती हैं
⚖️ क्यों अहम है ये मुद्दा?
- छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में से एक है
- धान खरीदी और वितरण सीधे किसानों की आय से जुड़ा मुद्दा है
- खराब भंडारण से सरकारी नुकसान + किसानों का भरोसा प्रभावित होता है
- यदि आरोप सही हुए तो यह बड़े आर्थिक घोटाले का रूप ले सकता है
👉 कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ धान भंडारण का नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, किसानों के हित और सरकारी जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।
