छत्तीसगढ़ के Dongargarh ब्लॉक के ग्राम कल्याणपुर से एक अलग तरह की पहल सामने आई है। जहां आमतौर पर लोग शराब दुकानों के विरोध में उतरते हैं, वहीं यहां के ग्रामीण अवैध शराब पर रोक लगाने के लिए सरकारी शराब दुकान खोलने की मांग कर रहे हैं।

🌾 क्या है पूरा मामला?
ग्रामीणों का कहना है कि:
- गांव में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार खुलेआम चल रहा है
- कई बार शिकायत करने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई
- कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई
👉 ऐसे में लोगों ने सोचा कि समस्या को खत्म करने के लिए वैध विकल्प जरूरी है।

🏛️ ग्राम सभा का बड़ा फैसला
- ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर शासकीय शराब दुकान खोलने की मांग की गई
- दुकान के लिए सरकारी जमीन भी चिन्हित कर ली गई
- बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने SDM कार्यालय पहुंचकर
- मुख्यमंत्री
- आबकारी मंत्री
- कलेक्टर और SDM
के नाम ज्ञापन सौंपा
🧠 ग्रामीणों की सोच क्या है?
ग्रामीणों का तर्क काफी व्यावहारिक है:
- सरकारी दुकान खुलने से अवैध कारोबारियों का धंधा बंद होगा
- शराब की बिक्री नियंत्रित और वैध तरीके से होगी
- गांव में गैरकानूनी गतिविधियों पर अंकुश लगेगा
👉 यानी “पूरी तरह रोक” के बजाय “नियंत्रण” को समाधान माना जा रहा है।
⚠️ आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ कहा है:
- अगर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो वे आंदोलन करेंगे
- प्रशासन पर दबाव बनाने की तैयारी शुरू
📌 विवादित पोस्टर से बढ़ा मामला
डोंगरगढ़ शहर में एक विवादित पोस्टर भी वायरल हो रहा है:
- 24 घंटे शराब उपलब्ध होने का दावा
- कुछ होटल और व्यक्तियों के नाम का जिक्र
- पुलिस संरक्षण जैसे गंभीर आरोप
- अन्य अवैध गतिविधियों का भी उल्लेख
👉 इससे कानून-व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
🏛️ प्रशासन के सामने चुनौती
अब प्रशासन के सामने दो बड़ी जिम्मेदारियां हैं:
- पोस्टर की सत्यता की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई
- गांव में अवैध शराब पर प्रभावी नियंत्रण
🎯 क्यों खास है यह मामला?
- आमतौर पर शराब दुकान का विरोध होता है, यहां समर्थन की मांग
- सिस्टम की कमजोरी के चलते लोग नया और व्यावहारिक समाधान ढूंढ रहे हैं
- यह मामला दिखाता है कि ग्राउंड लेवल पर सोच बदल रही है
👉 कुल मिलाकर, डोंगरगढ़ का यह मामला प्रशासन के लिए टेस्ट केस बन सकता है—जहां लोगों ने समस्या के समाधान के लिए परंपरागत सोच से हटकर रास्ता चुना है।
