यह खबर सीधे आम आदमी की रसोई, बाजार और सप्लाई चेन से जुड़ी है। आसान भाषा में पूरा मामला ऐसे समझिए:
इजरायल-ईरान युद्ध के 20 दिन बाद सबसे बड़ा असर एलपीजी सप्लाई पर दिख रहा है। वजह है होर्मूज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित होना। रॉयटर्स के मुताबिक भारत की एलपीजी सप्लाई पर दबाव बढ़ा, क्योंकि देश अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और उसका बहुत बड़ा भाग पश्चिम एशिया से आता है। सप्लाई अटकने से मार्च के पहले आधे हिस्से में भारत में एलपीजी खपत साल-दर-साल 17.3% और पिछले महीने के मुकाबले 26.3% तक गिर गई।

सरकार ने माना है कि स्थिति सामान्य नहीं है, लेकिन उसने यह भी कहा है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के मुताबिक पेट्रोल, डीजल और क्रूड की सप्लाई अभी पर्याप्त है, पर एलपीजी के मामले में सरकार ने अलग से कदम उठाए हैं—घरेलू जरूरतों को पहले रखा गया है, जबकि कमर्शियल और इंडस्ट्रियल खपत पर दबाव डाला गया है।
यही वजह है कि सरकार बार-बार लोगों से कह रही है कि पैनिक बुकिंग न करें। पिछले दिनों अचानक बुकिंग बढ़ गई थी, क्योंकि लोगों में डर फैल गया था कि सिलेंडर खत्म हो जाएंगे। इसी पैनिक को काबू करने के लिए सरकार ने साफ कहा कि अफवाहों से बचें और जरूरत के हिसाब से ही गैस बुक करें। इंडियन एक्सप्रेस और रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, सामान्य डिलीवरी साइकिल बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
आपके दिए गए टेक्स्ट की एक अहम लाइन है—“वैकल्पिक व्यवस्था भी तलाशे पब्लिक”। यह बात पूरी तरह हवा में नहीं है। सरकार ने वास्तव में लोगों को जहां संभव हो पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) अपनाने की सलाह दी है। रॉयटर्स के मुताबिक करीब 60 लाख घर ऐसे हैं जो सिलेंडर से PNG पर शिफ्ट हो सकते हैं। यही नहीं, सरकार ने कमर्शियल सेक्टर, होटल-रेस्तरां और छोटे उद्योगों के लिए भी वैकल्पिक ईंधन पर विचार करने को कहा है ताकि घरेलू रसोई गैस की सप्लाई बचाई जा सके।
सरकार सिर्फ अपील नहीं कर रही, सख्ती भी कर रही है। सुजाता शर्मा के हवाले से रिपोर्ट है कि एलपीजी की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ 4,500 से ज्यादा छापेमारी की गई। इसका मकसद यही है कि जो गैस घरेलू उपभोक्ताओं के लिए है, वह बीच रास्ते में ब्लैक मार्केट में न चली जाए।
अब बात घरेलू उत्पादन की। आपने 40% बढ़ोतरी का जिक्र किया है, और यह बात ताज़ा रिपोर्ट्स से काफी हद तक मेल खाती है। सरकार ने रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने, और प्रोपेन-ब्यूटेन जैसी फीडस्ट्रीम्स को पेट्रोकेमिकल्स से हटाकर एलपीजी की ओर मोड़ने का निर्देश दिया। इंडियन एक्सप्रेस की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक प्री-कॉन्फ्लिक्ट लेवल्स की तुलना में घरेलू एलपीजी उत्पादन में करीब 40% बढ़ोतरी हुई है।
विदेशी निर्भरता कम करने के लिए भारत ने अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस जैसे दूसरे स्रोतों से एलपीजी खरीद बढ़ाने की भी कोशिश की है। साथ ही बंदरगाहों पर एलपीजी जहाजों को प्राथमिकता से बर्थिंग देने, और रिफाइनरियों को अधिकतम उत्पादन करने के आदेश दिए गए हैं। यानी सरकार दो मोर्चों पर काम कर रही है—एक, बाहर से ज्यादा माल लाने की कोशिश; दो, देश के भीतर जितना बन सकता है उतना ज्यादा बनाना।
जहां तक खाड़ी में भारतीय जहाजों और नाविकों की बात है, ताज़ा सरकारी ब्रीफिंग के हवाले से बताया गया कि भारतीय जहाज और सीफेयरर सुरक्षित हैं। हालांकि कुछ जहाज क्षेत्र में फंसे या रुके हुए हैं, क्योंकि समुद्री मार्ग पर तनाव बना हुआ है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में पहले 22 और फिर 24 भारतीय जहाजों के प्रभावित/फंसे होने का जिक्र आया था, इसलिए इस संख्या को बिल्कुल फिक्स करके लिखने के बजाय “करीब दो दर्जन भारतीय जहाज” कहना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।
आपके टेक्स्ट का आखिरी हिस्सा—रियाद में 18 मार्च के हमले में एक भारतीय की मौत और अब तक 6 भारतीयों की जान जाने—मुझे अभी जिन भरोसेमंद स्रोतों तक पहुंच मिली, उनमें साफ और स्वतंत्र पुष्टि के साथ नहीं मिला। इसलिए इस हिस्से को पक्का तथ्य मानकर चलना ठीक नहीं होगा, जब तक इसका आधिकारिक बयान या मजबूत विश्वसनीय स्रोत न मिल जाए। यहां थोड़ी सावधानी जरूरी है।
पूरी खबर का मतलब यह है कि भारत में अभी पूर्ण एलपीजी ब्लैकआउट नहीं है, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण और गंभीर है। घरेलू सप्लाई किसी तरह संभाली जा रही है, कमर्शियल सेक्टर पर दबाव डाला गया है, वैकल्पिक ईंधन अपनाने की सलाह दी जा रही है, कालाबाजारी पर छापे पड़ रहे हैं, और सरकार आयात+उत्पादन दोनों मोर्चों पर काम कर रही है। यानी रसोई गैस अभी मिल रही है, मगर सिस्टम स्ट्रेच पर है।
