ईरान युद्ध और तेल झटके के बीच सोना-चांदी में आई गिरावट इस बार थोड़ा उल्टा खेल दिखा रही है। आमतौर पर जंग या भू-राजनीतिक तनाव में सोना “सेफ हेवन” बनकर चढ़ता है, लेकिन अभी तेज महंगाई की आशंका, ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने का डर, डॉलर की मजबूती और कैश जुटाने की मजबूरी—इन सबने मिलकर कीमती धातुओं को नीचे धकेल दिया है। Reuters के मुताबिक 23 मार्च 2026 को स्पॉट गोल्ड चार महीने के निचले स्तर तक फिसला और जनवरी के रिकॉर्ड हाई से करीब 25% नीचे चला गया; चांदी समेत दूसरे प्रेशियस मेटल्स भी तेज दबाव में रहे।
आपके दिए गए IBJA नंबरों के हिसाब से, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना लगभग ₹1.47 लाख से घटकर ₹1.35 लाख पर आ गया, यानी करीब ₹12,077 की गिरावट। वहीं 1 किलो चांदी लगभग ₹2.32 लाख से घटकर ₹2.01 लाख के आसपास आई, यानी करीब ₹30,864 की गिरावट। ET की 23 मार्च की रिपोर्ट और दूसरे भारतीय बाजार अपडेट्स भी यही दिखाते हैं कि भारत में उस दिन सोना-चांदी में बहुत तेज गिरावट दर्ज हुई।

अब सबसे बड़ा सवाल—जंग के बीच सोना गिर क्यों रहा है?
पहला कारण है तेल की तेज बढ़त। पश्चिम एशिया संकट के चलते ब्रेंट क्रूड $113 के आसपास पहुंच गया, जिससे बाजार को डर है कि महंगाई फिर तेज होगी। जब inflation बढ़ने का खतरा बढ़ता है, तो बाजार मानने लगता है कि केंद्रीय बैंक जल्दी दरें नहीं घटाएंगे, बल्कि सख्त रुख रखेंगे। ऊंची ब्याज दरें सोने के खिलाफ जाती हैं, क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता। Reuters ने साफ लिखा कि तेल-जनित inflation fears ने rate-cut उम्मीदों को कमजोर किया और इसी ने bullion पर दबाव बढ़ाया।
दूसरा कारण है कैश की भूख। जब बाजार में घबराहट बढ़ती है, तो कई बड़े निवेशक सोना-चांदी जैसे एसेट बेचकर नकदी जुटाते हैं, ताकि दूसरे नुकसान कवर कर सकें या liquidity बनाए रख सकें। यानी इस बार safe haven खरीदारी से ज्यादा forced selling / liquidity selling दिख रही है। Reuters और Business Insider, दोनों ने यही बात नोट की कि निवेशक losses cover करने और cash raise करने के लिए gold बेच रहे हैं।
तीसरा कारण है मजबूत डॉलर। वैश्विक तनाव बढ़ने पर डॉलर भी safe haven की तरह मजबूत होता है। जब डॉलर चढ़ता है, तो डॉलर में कीमत तय होने वाला सोना बाकी देशों के खरीदारों के लिए महंगा पड़ता है, जिससे demand पर असर आता है और कीमतों पर दबाव पड़ता है। साथ में profit booking भी चल रही है, क्योंकि जनवरी 2026 में सोना बहुत तेज भागा था और रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था। Reuters और MarketWatch दोनों ने जनवरी के शिखर से भारी correction की ओर इशारा किया है।
सालभर / हालिया ऊंचाई से कितना गिरा?
आपके दिए गए आंकड़ों के मुताबिक:
सोना 29 जनवरी 2026 के करीब ₹1.76 लाख के ऑल-टाइम हाई से घटकर अब ₹1.35 लाख पर है, यानी लगभग ₹41,000 नीचे।
अगर 31 दिसंबर 2025 के करीब ₹1.33 लाख के शुरुआती स्तर से तुलना करें, तो मौजूदा भाव अभी भी उससे थोड़ा ऊपर है, लेकिन जनवरी के शिखर से तेज correction साफ दिख रहा है।
चांदी के लिए आपके दिए गए डेटा के हिसाब से, सिर्फ हालिया स्तर ₹2.32 लाख से ₹2.01 लाख तक गिरावट करीब ₹31 हजार की है।
24 दिनों में गिरावट के दावे के तौर पर आपने जो संख्या दी है—सोना ₹23,956 और चांदी ₹65,200—वह यह दिखाती है कि correction सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि कई हफ्तों से जारी है। भारतीय मार्केट रिपोर्ट्स भी मार्च 2026 में bullion sell-off की पुष्टि करती हैं।
इसका भारत पर असर दो तरह का हो सकता है। जिन लोगों को ज्वेलरी खरीदनी है, उनके लिए यह थोड़ी राहत वाली खबर है क्योंकि ऊंचे स्तर से भाव नीचे आए हैं। लेकिन निवेशकों के लिए मामला tricky है, क्योंकि volatility अभी बहुत ज्यादा है। तेल, डॉलर, ब्याज दर और जंग—चारों का कॉम्बिनेशन market को झटके दे रहा है। इसलिए अभी की गिरावट को सिर्फ “cheap buying opportunity” मान लेना थोड़ा जल्दबाजी हो सकता है।
आसान भाषा में पूरा मामला यह है:
ईरान युद्ध → तेल महंगा → महंगाई का डर → rate cuts की उम्मीद कम → डॉलर मजबूत → निवेशक cash जुटाने लगे → सोना-चांदी गिरे।
