मुंबई। रक्षाबंधन के मौके पर ज्वेलरी ब्रांड GIVA का अभिनेत्री कृति सेनन के साथ बनाया गया विज्ञापन विवादों में घिर गया। विज्ञापन में कृति सेनन के पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और कई लोगों ने इसे भारतीय त्योहार और पारिवारिक परंपराओं के संदर्भ में अनुचित बताया। विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने विज्ञापन को अपने सभी मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का फैसला किया है।

इस पूरे मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कृति सेनन के पहनावे पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी थी। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कृति सेनन का बचाव करते हुए महिलाओं की पसंद और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया।
इस तरह एक विज्ञापन से शुरू हुआ विवाद अब महिलाओं की पसंद, पहनावे की स्वतंत्रता, भारतीय संस्कृति और त्योहारों की गरिमा जैसे बड़े मुद्दों तक पहुंच गया है।
GIVA ने विज्ञापन हटाकर जारी किया बयान
विवाद बढ़ने के बाद GIVA ने अपने बयान में कहा कि कंपनी भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों का सम्मान करती है। कंपनी के मुताबिक, उसका उद्देश्य हमेशा परिवार के साथ खुशियों भरे पलों को सेलिब्रेट करना रहा है।
कंपनी ने यह भी कहा कि इस बार विज्ञापन के जरिए वह पालतू जानवरों को भी परिवार के प्यार और उत्सव में शामिल करना चाहती थी। हालांकि, अगर इस विज्ञापन से अनजाने में समाज के किसी वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं, तो कंपनी का ऐसा कोई इरादा नहीं था।
GIVA ने विवाद को बढ़ाने के बजाय विज्ञापन हटाने का फैसला किया। कंपनी ने कहा कि सम्मान के तौर पर विज्ञापन को सभी मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया है।
कंपनी ने अपने बयान के अंत में रक्षाबंधन के त्योहार पर लोगों के लिए प्यार और सकारात्मकता की शुभकामनाएं भी दीं।
आखिर विज्ञापन में ऐसा क्या था, जिस पर हुआ विवाद?
रक्षाबंधन के मौके पर जारी किए गए इस विज्ञापन में कृति सेनन नजर आई थीं। विज्ञापन में उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने आपत्ति जताई। विवाद का मुख्य मुद्दा यह रहा कि रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक और पारंपरिक त्योहार से जुड़े विज्ञापन में अभिनेत्री का पहनावा कुछ लोगों को उपयुक्त नहीं लगा।
विज्ञापन के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसके पक्ष और विपक्ष में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे केवल एक फैशन और विज्ञापन से जुड़ा मामला बताया, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि त्योहारों से जुड़े विज्ञापनों में भारतीय पारिवारिक और सांस्कृतिक संदर्भों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
इसी विवाद के बीच GIVA ने विज्ञापन को हटा दिया।
कंगना रनौत ने कृति सेनन पर साधा निशाना
विज्ञापन को लेकर अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। कंगना ने कृति सेनन के पहनावे को लेकर सवाल उठाया और पूछा कि क्या कोई महिला बिकिनी या अंडरगारमेंट्स पहनकर अपने भाई को राखी बांधना पसंद करेगी।
कंगना ने अपने पोस्ट में महिलाओं की स्वतंत्रता और कपड़ों के विकल्पों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज महिलाओं के पास पहनावे के कई विकल्प मौजूद हैं। महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार कॉकटेल ड्रेस, लहंगा-चोली, जींस, साड़ी, बिकिनी या सलवार-कमीज जैसे अलग-अलग कपड़े पहन सकती हैं।
हालांकि, कंगना का तर्क था कि स्वतंत्रता के साथ कुछ अवसरों और पारिवारिक परंपराओं की मर्यादा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
‘महिलाओं के पास इतने विकल्प हैं तो…’
कंगना ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि आज की महिला ग्लोबल है और उसके पास अपनी पसंद के कपड़े चुनने की पूरी आजादी है। उन्होंने अलग-अलग तरह के परिधानों का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि जब इतने विकल्प मौजूद हैं तो रक्षाबंधन जैसे भाई-बहन के पारंपरिक त्योहार के दौरान किस तरह के कपड़ों का चुनाव किया जाना चाहिए।
कंगना की इस टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू कर दी। कुछ यूजर्स ने उनके बयान का समर्थन किया, जबकि दूसरे वर्ग ने इसे महिला की व्यक्तिगत पसंद में हस्तक्षेप बताते हुए आलोचना की।
राहुल गांधी ने किया कृति सेनन का बचाव
विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कृति सेनन का समर्थन किया। उन्होंने महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद के अनुसार जीवन जीने के अधिकार की बात कही।
राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को अपनी स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने के लिए निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं के पहनावे, काम और कहीं आने-जाने के फैसले को उनका व्यक्तिगत अधिकार बताया।
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सीधे तौर पर कृति सेनन को लेकर चल रही आलोचना के संदर्भ में थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वे क्या पहनती हैं, क्या करती हैं और कहां जाती हैं।
‘महिलाएं क्या पहनती हैं, यह उनकी पसंद’
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि महिलाओं के पहनावे और उनकी गतिविधियों को लेकर उन्हें ट्रोल करना बंद किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना जरूरी है।
उनके बयान के बाद विवाद को राजनीतिक रंग भी मिल गया। एक तरफ कंगना रनौत ने त्योहार और पारिवारिक परंपराओं के संदर्भ में पहनावे को लेकर सवाल उठाए, वहीं राहुल गांधी ने महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देने की बात कही।
इस तरह विज्ञापन को लेकर शुरू हुई बहस अब दो अलग-अलग विचारों में बंटती नजर आई—एक तरफ त्योहार की सांस्कृतिक और पारिवारिक मर्यादा का तर्क है, तो दूसरी तरफ महिला की व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता का सवाल है।
विज्ञापन हटाने के बाद भी जारी है बहस
GIVA ने विज्ञापन हटा दिया है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस पूरे विवाद को लेकर चर्चा जारी है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और इसी कारण उसने सम्मान के तौर पर विज्ञापन को सभी प्लेटफॉर्म से हटा लिया।
ब्रांड का यह कदम इस बात का संकेत भी माना जा रहा है कि त्योहारों से जुड़े विज्ञापनों में कंपनियों के लिए सांस्कृतिक संवेदनशीलता कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। खासकर रक्षाबंधन जैसे त्योहार, जो परिवार और भाई-बहन के रिश्ते से सीधे जुड़े हैं, उनके विज्ञापनों को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया काफी संवेदनशील हो सकती है।
विज्ञापन से शुरू हुई बहस महिला स्वतंत्रता तक पहुंची
कृति सेनन के GIVA विज्ञापन से जुड़ा विवाद केवल एक विज्ञापन के हटाए जाने तक सीमित नहीं रहा। इसमें भारतीय संस्कृति, त्योहारों की गरिमा, सेलिब्रिटी की जिम्मेदारी, फैशन और महिला स्वतंत्रता जैसे कई मुद्दे शामिल हो गए हैं।
कंगना रनौत का कहना है कि स्वतंत्रता के बावजूद महिलाओं को अवसर और संदर्भ के अनुसार मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। दूसरी ओर राहुल गांधी का तर्क है कि महिलाओं को उनके पहनावे और व्यक्तिगत फैसलों के लिए निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
यानी दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाओं ने इस मामले को सोशल मीडिया पर और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।
GIVA के फैसले के बाद अब क्या?
फिलहाल GIVA ने विवादित विज्ञापन को अपने मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा लिया है। कंपनी ने माफी की भाषा में यह स्पष्ट किया कि उसका किसी की भावनाओं को आहत करने का उद्देश्य नहीं था।
कृति सेनन की ओर से इस पूरे विवाद पर अलग से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं कंगना और राहुल गांधी की प्रतिक्रियाओं ने मामले को राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना दिया है।
रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार के विज्ञापन से शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में भी चर्चा में रह सकता है, क्योंकि इसमें एक तरफ भारतीय सांस्कृतिक मान्यताओं का सवाल है और दूसरी तरफ महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता का मुद्दा।
