Exchange-Traded Fund यानी ETF में अचानक आई तेजी की सबसे बड़ी वजह केंद्र सरकार द्वारा सोने और चांदी के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाना रहा। जैसे ही सरकार ने ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% की, घरेलू बाजार में गोल्ड और सिल्वर की कीमतें तेजी से उछल गईं और इसका सीधा फायदा Gold-Silver ETFs को मिला।

आखिर ETFs में इतनी तेजी क्यों आई?
सरकार ने क्या बदला?
पहले:
- कुल Import Duty: 6%
अब:
- 10% Basic Customs Duty
- 5% AIDC (Agriculture Infrastructure and Development Cess)
यानि कुल प्रभावी टैक्स:
15%
जब इंपोर्ट महंगा होता है तो:
- भारत में सोना-चांदी की कीमतें बढ़ती हैं
- MCX पर futures तेजी पकड़ते हैं
- ETFs की NAV भी ऊपर चली जाती है
Gold ETFs में कितनी तेजी आई?
सबसे ज्यादा उछाल:
- Quantum Mutual Fund का Quantum Gold Fund
- लगभग 15% उछला
- 124.90 से बढ़कर 143.37 तक पहुंचा
इसके अलावा:
- Tata Asset Management का Tata Gold ETF
- करीब 12% चढ़ा
- Zerodha Fund House का Zerodha Gold ETF
- लगभग 9% उछला
बाकी ज्यादातर गोल्ड ETFs में:
- 4% से 8% तक की तेजी देखी गई
Silver ETFs में क्या हुआ?
सिल्वर ETFs में भी जोरदार buying देखने को मिली।
सबसे ज्यादा तेजी:
- HDFC Asset Management Company का HDFC Silver ETF
- UTI Asset Management Company का UTI Silver ETF
इनमें:
- 9% तक की तेजी दर्ज हुई
बाकी Silver ETFs:
- 6%–9% तक उछले
MCX पर सोना-चांदी कितने बढ़े?
Silver Futures
- जुलाई 2026 डिलीवरी
- लगभग 6% उछाल
- कीमत: 2,95,805 रुपए प्रति किलो
Gold Futures
- जून 2026 डिलीवरी
- करीब 6% तेजी
- कीमत: 1,62,648 रुपए प्रति 10 ग्राम
इससे साफ है कि ETF rally सिर्फ sentiment नहीं, बल्कि underlying metal prices की वजह से आई।
ETFs आखिर काम कैसे करते हैं?
Gold और Silver ETFs:
- शेयर बाजार में ट्रेड होने वाले फंड होते हैं
- जिनकी कीमत underlying gold/silver के हिसाब से बदलती है
उदाहरण:
- अगर सोना 5% महंगा होता है
- तो Gold ETF भी लगभग उतना ही बढ़ता है
इसलिए bullion prices बढ़ते ही ETF prices भी तेजी से ऊपर जाते हैं।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
1. Panic Buying से बचें
मार्केट एक्सपर्ट अभिषेक भीलवारिया के मुताबिक:
- तेजी देखकर जल्दबाजी में entry नहीं करनी चाहिए
- ऊंचे स्तर पर profit booking का खतरा रहता है
2. SIP बेहतर रणनीति
एकमुश्त निवेश के बजाय:
- SIP के जरिए धीरे-धीरे निवेश
- volatility को average करने में मदद करता है
3. Long Term View जरूरी
Gold-Silver ETFs आमतौर पर:
- inflation hedge
- currency weakness protection
- geopolitical uncertainty के दौरान safe-haven asset माने जाते हैं
आगे कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?
तेजी जारी रह सकती है अगर:
- डॉलर कमजोर होता है
- वैश्विक तनाव बढ़ता है
- ब्याज दरों में कटौती होती है
- भारत में import cost ऊंची रहती है
दबाव आ सकता है अगर:
- global profit booking शुरू हो
- डॉलर मजबूत हो
- केंद्रीय बैंक सख्त monetary policy रखें
क्या अभी निवेश करना चाहिए?
किसके लिए ठीक?
- Long-term diversification चाहने वाले निवेशक
- Inflation hedge चाहने वाले
- Portfolio में 5–15% safe asset allocation रखने वाले
किन्हें सावधान रहना चाहिए?
- Short-term trading करने वाले
- तेजी देखकर FOMO में entry लेने वाले
क्योंकि इतनी तेज rally के बाद volatility बढ़ सकती है।
ध्यान रखने वाली बात
Gold-Silver ETFs में निवेश करते समय:
- Expense Ratio
- Tracking Error
- Liquidity
- Fund Size
जैसे factors भी जरूर देखें। सिर्फ तेजी देखकर ETF चुनना सही रणनीति नहीं माना जाता।
