- सामान्य अंग्रेजी शराब = कई जगह महंगी
- कुछ हाई-एंड/इम्पोर्टेड ब्रांड = राहत
- बियर = लगभग हर तरफ महंगी
- देशी = कोई बदलाव नहीं
यानी यह “सभी विदेशी शराब सस्ती” वाली बात नहीं है, बल्कि सेगमेंट-वाइज बदलाव है।

आम उपभोक्ता पर क्या असर पड़ेगा?
1) बियर पीने वालों पर सबसे ज्यादा असर
गर्मी में सबसे ज्यादा मांग बियर की रहती है।
अगर कोई व्यक्ति हफ्ते में 3–4 बोतल लेता है, तो महीने में ₹240–₹320 तक अतिरिक्त खर्च आ सकता है।
2) मिड-रेंज शराब पीने वालों का बजट बिगड़ेगा
रॉयल स्टैग, मैकडॉवेल्स, ऑफिसर्स चॉइस, ब्लेंडर्स प्राइड जैसे ब्रांड लेने वालों को हर बोतल पर ₹60–₹90 तक ज्यादा देना होगा।
3) प्रीमियम ग्राहकों को सीमित राहत
जो लोग हाई-एंड इम्पोर्टेड शराब खरीदते हैं, उन्हें कुछ ब्रांड्स में फायदा हो सकता है। सरकार शायद इसी सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना चाहती है।
सरकार ने ऐसा क्यों किया?
नई दरों के पीछे कुछ संभावित वजहें समझी जा रही हैं:
1. राजस्व बढ़ाना
शराब राज्य सरकारों की कमाई का बड़ा स्रोत होती है।
बियर और मिड-रेंज ब्रांड्स सबसे ज्यादा बिकते हैं, इसलिए इन पर रेट बढ़ाने से राजस्व तेजी से बढ़ता है।
2. प्रीमियम मार्केट को पकड़ना
महंगी विदेशी शराब पर राहत देकर सरकार प्रीमियम खरीदारों को राज्य के भीतर खरीद के लिए आकर्षित करना चाहती है।
3. बाजार में संतुलन
जहां आम खपत वाले सेगमेंट से राजस्व लिया जाए, वहीं हाई-एंड सेगमेंट में कीमतें “प्रतिस्पर्धी” रखी जाएं—यह नीति उसी दिशा में दिखती है।
दुकानों पर क्या ध्यान रखें?
नई रेट लिस्ट लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को 3 बातें जरूर देखनी चाहिए:
- MRP/रेट लिस्ट जरूर चेक करें
- बिल लें
- अगर तय रेट से ज्यादा वसूली हो रही हो, तो आबकारी विभाग में शिकायत करें
क्योंकि पहले भी कई जगहों पर रेट लिस्ट से ऊपर वसूली की शिकायतें सामने आती रही हैं।
इस खबर का सबसे मजबूत निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ की नई शराब नीति का सार एक लाइन में यह है:
“देशी शराब जस की तस, बियर और मिड-रेंज शराब महंगी, जबकि कुछ हाई-एंड विदेशी ब्रांड्स को राहत।”
यानी अगर आप आमतौर पर बियर, ब्रांडेड व्हिस्की या RTD लेते हैं, तो अब आपकी जेब पर असर पड़ेगा।
लेकिन अगर आप प्रीमियम इम्पोर्टेड सेगमेंट के ग्राहक हैं, तो कुछ मामलों में राहत मिल सकती है।
