नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के 10वें संस्करण को संबोधित करते हुए डिजिटल तकनीक, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 6G, साइबर सुरक्षा और डिजिटल फ्रॉड जैसे मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में मोबाइल फोन की भूमिका केवल बातचीत और इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले डिवाइस तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सुशासन और सरकारी योजनाओं की डिलीवरी का अहम माध्यम बन गया है।

प्रधानमंत्री ने DBT व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाया जा रहा है। उनके मुताबिक डिजिटल सिस्टम के कारण सरकारी योजनाओं में होने वाली लीकेज को रोकने में मदद मिली है और बड़ी रकम गलत हाथों में जाने से बची है।
DBT से 50 लाख करोड़ रुपये सीधे खातों में पहुंचने का दावा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि DBT के जरिए अब तक करीब 50 लाख करोड़ रुपये लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर किए गए हैं।
उन्होंने दावा किया कि डिजिटल व्यवस्था के इस्तेमाल से सरकारी योजनाओं में होने वाली लीकेज को रोकने में मदद मिली और करीब 5 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई।
प्रधानमंत्री के मुताबिक पहले सरकारी योजनाओं का पैसा लाभार्थियों तक पहुंचने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर बिचौलियों और लीकेज की समस्या रहती थी। डिजिटल भुगतान, बैंक खातों और मोबाइल आधारित सेवाओं ने इस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद की है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल नंबर, बैंक खाते और डिजिटल पहचान के बीच जुड़ाव ने सरकार के लिए योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थी तक पहुंचाना आसान किया है।
‘जिनकी मुफ्त की कमाई बंद हुई, वो मोदी से प्यार करेंगे क्या?’
DBT और सरकारी योजनाओं में लीकेज रोकने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष और आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों की “बिना मेहनत की कमाई” बंद हुई है, वे मोदी से प्यार करेंगे क्या?
उन्होंने संकेत दिया कि डिजिटल ट्रांसफर व्यवस्था से उन लोगों की भूमिका खत्म हुई है जो सरकारी योजनाओं के पैसे में कथित तौर पर गड़बड़ी या बिचौलिये के तौर पर फायदा उठाते थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सरकारी सहायता को बिना लीकेज के सही लाभार्थियों तक पहुंचाना है और आलोचना के बावजूद यह काम जारी रहेगा।
मोबाइल फोन अब सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल में बड़ा बदलाव आया है।
पहले मोबाइल फोन का मुख्य इस्तेमाल कॉल और मैसेज के लिए किया जाता था, लेकिन अब यही डिवाइस बैंकिंग, सरकारी सेवाओं, डिजिटल भुगतान, शिक्षा, स्वास्थ्य और कारोबार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
उन्होंने कहा कि आज सैकड़ों सरकारी सेवाएं मोबाइल फोन के जरिए उपलब्ध हैं। लोगों को कई छोटे-बड़े कामों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
इस बदलाव को प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
2017 में शुरू हुआ IMC अब वैश्विक मंच
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस के सफर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2017 में शुरू हुआ इंडिया मोबाइल कांग्रेस अब एक बड़े वैश्विक मंच के रूप में विकसित हो चुका है।
इस वर्ष के आयोजन में 100 से अधिक देशों की भागीदारी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब मोबाइल और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश बन रहा है।
उन्होंने कहा कि इस बार IMC में AI और 6G पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
AI और 6G पर भारत का फोकस
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आने वाले समय में AI और 6G डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण क्षेत्र होंगे।
AI का इस्तेमाल सरकारी सेवाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कृषि और अन्य क्षेत्रों में बढ़ रहा है। वहीं 6G को लेकर दुनिया के कई देश भविष्य की कनेक्टिविटी तकनीक पर काम कर रहे हैं।
भारत भी इस क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने और वैश्विक टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में अपनी भूमिका मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
डीपफेक और साइबर फ्रॉड बड़ी चुनौती
प्रधानमंत्री ने डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ पैदा हो रही चुनौतियों पर भी चिंता जताई।
उन्होंने डीपफेक, साइबर फ्रॉड और डेटा सुरक्षा को डिजिटल युग की बड़ी चुनौतियों में शामिल किया। AI की मदद से बनाए जा रहे फर्जी वीडियो, ऑडियो और तस्वीरों के जरिए लोगों को गुमराह करने का खतरा बढ़ रहा है।
इसी तरह ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध के मामले भी चुनौती बन रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए केवल किसी एक देश के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए वैश्विक सहयोग और मजबूत डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है।
भारत के गेमिंग सेक्टर का भी जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के तेजी से बढ़ते गेमिंग सेक्टर का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि देश में 50 करोड़ से ज्यादा लोग गेमिंग इकोसिस्टम से जुड़े हैं। खास बात यह है कि गेमिंग की पहुंच केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों के युवा भी इस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
गेमिंग के साथ-साथ ई-स्पोर्ट्स, गेम डेवलपमेंट, एनीमेशन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
डिजिटल इंडिया के अगले चरण पर नजर
PM मोदी के IMC संबोधन का बड़ा संदेश यही रहा कि भारत में मोबाइल और डिजिटल तकनीक अब केवल सुविधा का माध्यम नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था और शासन का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।
DBT के जरिए सरकारी योजनाओं की डिलीवरी, मोबाइल के जरिए सेवाओं की उपलब्धता, AI का बढ़ता इस्तेमाल और भविष्य की 6G तकनीक भारत के डिजिटल बदलाव के अगले चरण को तय कर सकते हैं।
हालांकि, इस डिजिटल विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी, डीपफेक और ऑनलाइन फ्रॉड जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में तकनीकी विकास के साथ सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
